Monday, March 23, 2026
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शासकीय महाविद्यालय में शिक्षक दिवस का आयोजन

सरायपाली। स्व. राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह शासकीय महाविद्यालय सरायपाली में शिक्षक दिवस का आयोजन किया गया ।इस समारोह के मुख्य अतिथि हेमलता पटेल सहायक प्राध्यापक,अध्यक्षता प्रभारी प्राचार्य और रसायन विभागाध्यक्ष शबया पटेल और विशिष्ट अतिथि के रूप में यू के बरिहा विभागअध्यक्ष राजनीति विज्ञान मंचाचीन थे। सर्वप्रथम विद्या की देवी मां सरस्वती के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया तत्पश्चात महाविद्यालय में कार्यरत समस्त सहायक प्राध्यापक एवं शिक्षकों को पुष्प गुच्छ और तिलक लगाकर स्वागत वंदन किया गया। राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों के द्वारा सरस्वती वंदना एवं लक्ष्य गीत की प्रस्तुति दी गई । जानकी वैष्णव के द्वारा शिक्षक दिवस के अवसर पर गुरु वंदना का गायन किया गया। विशिष्ट अतिथि यू के बरिहा ने शिक्षक दिवस के महत्व के बारे में बताते हुए कहा की डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक राष्ट्रपति ही नहीं अपितु एक महान शिक्षाविद थे और उन्होंने अपनी सारी जिंदगी शिक्षा के प्रति समर्पित कर दिया था। शिक्षा वहनींव का आधार है जिस पर सशक्त राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है, बच्चों के जीवन में माता-पिता के बाद सबसे महत्वपूर्ण भूमिका शिक्षक निभाता है। शिक्षक केवल किताबें ही नहीं पढ़ाते तभी तो छात्रों को जीवन के मूल्य नैतिकता अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी का भी पाठ सीखाते हैं, छात्रों में छिपी क्षमता को पहचान और सही दिशा में ले जाने में मदद करते हैं, शिक्षक एक मूर्तिकार की तरह होता है जो कच्चे पत्थर को तरस कर एक सुंदर और मूल्यवान कलाकृति में आकार देता है। शिक्षक दिवस के अवसर पर उन शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करें जिनके ज्ञान एवं सही मार्गदर्शन से हम एक अच्छे नागरिक के रूप में अपनी जिम्मेदारी को निर्वहन करने के लिए तत्पर हैं ।राष्ट्र की प्रगति में उसके नागरिकों की शिक्षा पर निर्भर करता है और यह शिक्षा आज शिक्षकों के हाथों में निहित है। शिक्षा के माध्यम से ज्ञान,कौशल और मूल्यों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाया जाता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही शब्या पटेल ने कहा कि शिक्षा को किसी भी राष्ट्र के विकास की रीढ़ माना जाता है हम केवल एक दिन शिक्षक दिवस ना बनाएं बल्कि अपने जीवन में शिक्षकों के महत्व को समझे और सम्मान दें जिसके हुए हकदार हैं। शिक्षक केवल व्यक्ति ही नहीं होता बल्कि वह ज्ञान का पुंज होता है न जाने कितने की जीवन को आलोकित करता है, भारत में शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का मूल आधार माना गया है राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारतीय शिक्षा व्यवस्था को एक नई दिशा प्रदान की है ,इस नीति को सफल बनाने में सबसे बड़ी भूमिका शिक्षकों की है शिक्षक नीति की आत्मा को समझकर उसे व्यवहार में लेंगे तभी वास्तविक लाभ विद्यार्थियों और समाज तक पहुंचेगी, इसलिए वर्तमान समय में शिक्षक की भूमिकाएं और अपेक्षाएं महत्वपूर्ण हो जाती हैं ।भारत के भविष्य की दिशा इस बात पर निर्भर करती है कि शिक्षक कितने समर्पित प्रशिक्षित एवं दूरदर्शी हैं जो अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता है जो भारत को शिक्षा के क्षेत्र में विश्व गुरु बनाने की दिशा में अग्रसर हो सकता है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हेमलता पटेल ने मानव मूल्यों की स्थापना और संवर्धन के लिए शिक्षा को अनिवार्य अंग बताया। गुरु को शिक्षा के उद्देश्य उसकी विषय वस्तु तथा उसके उपादान आदि सबको निर्धारित करने का दायित्व मिला है ,जीवन में आगे बढ़ाने वाले सभी लोगों ने जीवन यात्रा में गुरु के प्रति कृतज्ञता की भाव व्यक्त की है। गुरु वह होता है जो ज्ञान के प्रकाश से शिष्य की आंखों को खोल देता है ,आधुनिक युग में ज्ञान की परंपरा और व्यवस्था में विविधता आई है शिक्षा पाने के लिए तकनीकी प्रगति की कृपा से मानवीकृत होते जा रही है ।सोशल नेटवर्किंग इंस्टाग्राम फेसबुक ऑनलाइन सीखने की प्रक्रिया गति पर पड़ रही है लेकिन गुरु के सानिध्य में प्रशिक्षण प्राप्त करना महत्वपूर्ण होता है ।ज्ञान के अतिरिक्त राजनीतिक भ्रष्टाचार और अवांछित हस्तक्षेप शिक्षा की व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं समाज के भविष्य को बढ़ाने शिक्षकों का अहम योगदान हो सकता है ,यदि भारत को विकसित राष्ट्र की श्रेणी में लाना है तो गुरु संस्था को सशक्त बना के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। शिक्षक पढ़ाने के साथ साथ जीवन जीने की कला भी सिखाते हैं कार्यक्रम का संयुक्त संचालक पार्वती रात्रि और शारदा चौरसिया एवं आभार प्रदर्शन वरिष्ठ स्वयंसेवक जयंती साहू ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापकगण अधिकारी कर्मचारी एवं अधिक संख्या में राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

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