Friday, August 29, 2025
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सरायपाली / खेत में पसीना, पंचायत में फैसला – यही है सभापति भास्कर की असली पहचान”

 

महासमुंद | 14 जुलाई 2025
“किसान की बेटी हूँ, खेती करना मेरा कर्म है, अपने साथ दूसरों का पेट भरना मेरा धर्म है।” – यह कोई प्रचार पंक्ति नहीं, बल्कि महासमुंद जिला पंचायत की सभापति श्रीमती कुमारी भास्कर का जीवंत संकल्प है, जिसे वे खेत की मिट्टी में रोज निभा रही हैं।

जैसे ही जिले में मानसून सक्रिय हुआ, किसानों ने खेतों की ओर रुख किया। धान की रोपाई तेजी से शुरू हुई और इसी सिलसिले में एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने सबका ध्यान खींचा – जिला पंचायत की सभापति खुद खेत में उतरकर रोपाई करती नज़र आईं।

नेता नहीं, खेत की कर्मयोगिनी

जहाँ आमतौर पर जनप्रतिनिधि सभाओं, बैठकों और फोटोशूट में व्यस्त नजर आते हैं, वहाँ कुमारी भास्कर ने अपनी अलग पहचान गढ़ी है। वे खेतों में काम करती हैं, ट्रैक्टर चलाती हैं, और धान की क्यारी में हाथ से रोपाई करती हैं।

उनका मानना है कि यदि हम धरती से जुड़ना छोड़ दें, तो जनसेवा केवल शब्द बनकर रह जाती है। खेती करना उनके लिए परंपरा नहीं, जिम्मेदारी है। यही कारण है कि वे अपने पद के साथ किसान के धर्म को भी बखूबी निभा रही हैं।

समाज को बदलने वाली तस्वीर

महासमुंद जैसे अर्ध-ग्रामीण क्षेत्र में, जहां परंपराएँ अब भी मजबूत हैं, वहाँ एक महिला का इस तरह खेत में सक्रिय होना महिला सशक्तिकरण की सबसे सशक्त तस्वीर है। कुमारी भास्कर खुद उदाहरण बनकर यह साबित कर रही हैं कि महिलाएं केवल भाषणों में नहीं, बल्कि हर मैदान में अग्रणी भूमिका निभा सकती हैं।

एक कविता, जो भास्कर को समर्पित है

> ना साज-श्रृंगार, ना दिखावा,
सेवा मं विश्वास, खेती मं दावा।
ट्रैक्टर के पहिए संग बढ़थें,
हर माई-बहिनी ला संदेश देथें।

 

यह पंक्तियाँ कुमारी भास्कर की असली पहचान को उजागर करती हैं – एक सरल, कर्मठ और जनसेवा में समर्पित महिला।

नारी शक्ति की मिसाल

पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। लेकिन कुमारी भास्कर जैसे नेता यह जवाब खुद बनकर सामने आए हैं। वे न केवल राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक मोर्चों पर भी नेतृत्व कर रही हैं।

उनकी यह कार्यशैली आज की महिलाओं के लिए एक संदेश है –
“सीमा तुम्हारी सोच है, अवसर तुम्हारी शक्ति।”

भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणा

कुमारी भास्कर आज की नहीं, आने वाली पीढ़ियों की नेता हैं। उन्होंने यह सिद्ध किया है कि एक महिला एक साथ किसान, जनसेवक, नेतृत्वकर्ता और समाज सुधारक हो सकती है।

 

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