
सरायपाली। 14 फरवरी को जहाँ एक ओर समाज का एक वर्ग पश्चिमी संस्कृति का अनुकरण करते हुए वेलेंटाइन डे मना रहा था और भारतवर्ष की प्राचीन सभ्यता, संस्कार एवं पारिवारिक मूल्यों से विमुख होता जा रहा है, वहीं प्रमोद सागर, जिलाध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी अजा मोर्चा, महासमुंद ने मातृ-पितृ दिवस के अवसर पर अपने माता-पिता का चरण धोकर, चरण स्पर्श कर तथा शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित करते हुए समाज के सामने भारतीय संस्कृति का एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया।
भारतीय जीवन दर्शन में माता-पिता को ईश्वरतुल्य माना गया है। रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी ने मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम चन्द्र के आदर्श चरित्र का वर्णन करते हुए स्पष्ट किया है कि वे प्रातःकाल जागरण के पश्चात सर्वप्रथम अपने माता-पिता एवं गुरुजनों को प्रणाम करते थे। यही आचरण भारतीय संस्कृति की आत्मा और संस्कारों की आधारशिला है।

इसी महान परंपरा का अनुसरण करते हुए प्रमोद सागर प्रतिदिन प्रातः अपने माता-पिता का चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। मातृ-पितृ दिवस के अवसर पर किया गया यह सम्मान केवल एक व्यक्तिगत भाव नहीं, बल्कि समाज और विशेष रूप से युवा पीढ़ी के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि माता-पिता का सम्मान, सेवा और आज्ञापालन ही सच्चा संस्कार, चरित्र निर्माण और भारतीयता की पहचान है।
इस आयोजन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि आधुनिकता के दौर में भी यदि भारतीय समाज अपनी जड़ों, मूल्यों और परंपराओं से जुड़ा रहे, तो वह सांस्कृतिक रूप से और अधिक सशक्त बन सकता है। मातृ-पितृ सम्मान का यह आयोजन भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों एवं सामाजिक चेतना को पुनः जागृत करने की दिशा में एक प्रेरणादायी और अनुकरणीय पहल सिद्ध हुआ है।




