
महासमुंद कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष डॉ रश्मि चंद्राकर ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि भाजपा सरकार किसानों को धान बेचने से वंचित करने जैसी स्थिति बना रही है। न तो शासन गंभीर है और न ही भाजपा के चुने हुए जनप्रतिनिधियों को किसानों की चिंता है। भाजपा सरकार को किसानों की समस्याएँ दिखाई ही नहीं दे रहीं। हर धान खरीदी केंद्र में प्रतिदिन मात्र 10–15 किसान ही धान बेच पा रहे हैं।किसान लगातार चक्कर काट रहे हैं, लेकिन भाजपा के चुने हुए जनप्रतिनिधि समाधान के लिए शासन-प्रशासन को साधारण पत्राचार तक करना आवश्यक नहीं समझ रहे। एग्रोस्टेक पोर्टल के नाम पर किसानों का रकबा काटा जा रहा है, अनावरी रिपोर्ट के नाम पर फसल की पैदावार काटी जा रही है, बहुत बड़ी चुनौती किसानों के सामने है. आगे डॉ रश्मि चंद्राकर ने कहा कि बिजली की समस्या अलग है, जमीन के जो दाम बढ़े हैं उसकी लड़ाई अलग है,डॉ रश्मि चंद्राकर ने कहा कि
अभी तो भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का घेराव हो गया है, अभी देखते जाइए भाजपा का कोई नेता गांवों में, शहरों में नहीं घुस पाएगा.भाजपा सरकार के पास धान खरीदी को लेकर कोई उचित व्यवस्था नहीं हैं सुबह 8 बजे से किसान टोकन तुहर द्वार एप में में लगे रहते हैं जब एप खुलता है तो टोकन फूल हो जाता है।

किसानो को आन लाइन टोकन नहीं मिल रहा है किसान टोकन के लिए सोसाइटी में भटक रहे हैं भारतीय जनता पार्टी की सरकार में ना टोकन कट रहा है ना धान बेच पा रहे कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार ने कोरोना महामारी की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद सुचारू व्यवस्था के साथ हुआ था, 5 साल धान खरीदी
वहीं आज भाजपा की लापरवाही से धान खरीदी पूरी तरह ठप है। पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष डॉ रश्मि चंद्राकर ने बताया कि ऐप पर मात्र कुछ मिनट में ही टोकन कटना बंद हो जाता है। तकनीक न जानने के कारण बुजुर्ग, आदिवासी और सामान्य किसान टोकन कटवाने के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं।
धान की कटाई पूरा करने के बाद भी बेच नहीं पा रहे डॉ रश्मि चंद्राकर बताया कि महासमुंद जिले के अधिकतर किसानों को न तो मोबाइल चलाना आता है और न ही टोकन कटाने की प्रक्रिया समझ में आती है। इसके कारण हजारों किसान धान की कटाई पूरा करने के बाद भी बेच नहीं पा रहे हैं। डॉ रश्मि चंद्राकर ने ऑफलाइन टोकन व्यवस्था फिर से शुरू करने की मांग करते हुए कहा कि यह जनहित का मुद्दा है। यदि समय पर समाधान नहीं हुआ, तो किसान धान बेचने से वंचित रह जाएंगे।
महासमुंद जिले के लगभग 90% किसानों की धान कटाई पूरी हो चुकी है, लेकिन टोकन न मिलने से वे चिंतित और असहाय महसूस कर रहे हैं। डॉ रश्मि चंद्राकर ने कहा कि यदि ऑफलाइन टोकन व्यवस्था जल्द बहाल नहीं की गई, तो वे समय पर धान बेच नहीं पाएंगे।




